अब किससे कहूँ तुम्हारी याद आ रही है,
 धीरे धीरे आँसू कि धार नदियाँ बना रही है।

तुम्हारे चुम्बन ने मानों समन्दर भर दिया,
मानों आँखें अब सागर होती जा रही है।

बाहोँ में सिमट के हमनें पुरा जिस्म चुमा,
मेरे बदन में तुम्हारी ही खुशबू आ रही है।

खूद को देखना आईने में तो गौर करना,
तुम्हारे यौवन में हमेशा मेरी लहरें जारी है।


        ~विशेष









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