रेगिस्तान में नहरें बनाऊँ मोड़ दूं धारा नदी का रोप दूँ कुछ पौध नन्हे धरती के उस गोद में मालूम है कुछ सुखेंगे फिर भी कुछ तो बचेंगे,ऐसे धीरे धीरे हरियाली सजेगी बंजर घाव कि लाली भरेगी तब धूप का रंग भी प्यारा छाँव के संग संग चलेगा प्रकृति से रिश्ता मनोरम रेत कि उसी जहाँ में हवा मीठा मीठा बहेगा चाँद का थिरके उजाला प्रेम की कलियाँ खिलेगी जीवन में खुशियाँ मिलेगी.
Posts
Showing posts from May, 2020
- Get link
- X
- Other Apps
अब किससे कहूँ तुम्हारी याद आ रही है, धीरे धीरे आँसू कि धार नदियाँ बना रही है। तुम्हारे चुम्बन ने मानों समन्दर भर दिया, मानों आँखें अब सागर होती जा रही है। बाहोँ में सिमट के हमनें पुरा जिस्म चुमा, मेरे बदन में तुम्हारी ही खुशबू आ रही है। खूद को देखना आईने में तो गौर करना, तुम्हारे यौवन में हमेशा मेरी लहरें जारी है। ~विशेष
मदर डे
- Get link
- X
- Other Apps
हमारे समाज में एक ऐसी लड़की ढुंढ़ी जाती है जो शादी के बाद घर में रहे और घर चला सके.अपने सपनों को ताख पे रखे और बच्चे पैदा करे.फिर परवरिश करे ,सुबह से लेकर रात तक घर कि सबसे आखिरी जिम्मेदारी उठाए.उसकी तमाम उम्र कट जाती है एक कथित समाजिकता और आदर्शवादिता निभाने में.अधिकतर हम ऐसी ही माँ देखते या ढूँढ़ते हैं ना. यार पुरी ढंग कि एक सोची समझी साजिश टाइप प्रवृत्ति है ,बार बार ये कथित समाज आपको इसीमें उलझाए रखेंगे.माँ को बधाई देने से दुनियां माँ कि दुनिया नहीं बदलेगी. माँ के लिए कुछ करिए. धैर्य से लड़ाई लड़ें और आसमां में उड़ें . क्योंकि लडकियों खासतौर पर माँ ये नहीं चाहेगी कि आप बेड़ियों में जकड़ी हूई अगली माँ बनें.