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मैं तुम्हें ऐसे जीता हूँ जैसे जड़ें जमीन  मछली पानी  परिन्दे उड़ान  चाँद तारे आसमान  मजदूर अपने काम  बाकी जीवन के आखिरी सांस में लुँगा तुम्हारा नाम और कल्पना करूंगा वो प्रेम के धर्म का सबसे सुनहरा भविष्य हो.    ~विशेष