जीवन कि नीवं 
मजबूत करते वक्त
बेहताशा रोए जा रहा 
फिर सम्हल रहा 
खूद से खूद को तसल्ली
एक घर भी तो नहीं बनता
 बिन पानी,परेशानी और  दु:ख के
खैर! ये तो समुचा जीवन है.

  ~विशेष



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